
बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक समस्या है। सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि बाल विवाह पर सख्त नियंत्रण किया जाए। इसके तहत सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम का सख्ती से पालन हो। सुप्रीम कोर्ट के नए दिशा-निर्देशों से उत्साहित होकर, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस (JRCA), एक गैर सरकारी संगठन ने जमीनी स्तर पर प्रयासों को तेज करने की कसम खाई है। उनका लक्ष्य सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से 2030 तक राजस्थान में बाल विवाह को समाप्त करना है, जिसमें गांवों में जागरूकता बढ़ाना भी शामिल है।
बाल विवाह को रोकने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों, स्कूल अधिकारियों और बाल संरक्षण अधिकारियों पर डाली गई है। न्यायालय ने बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए “रोकथाम, संरक्षण और अभियोजन” मॉडल अपनाने की सिफारिश की। 2024 में, राजस्थान उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के तहत बाल विवाह को रोकने के लिए ग्राम सरपंच जिम्मेदार होंगे। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, राजस्थान में 20-24 वर्ष की आयु की 25.4% महिलाओं की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के बाल विवाह समाप्ति के दिशा-निर्देशों का विवरण प्रस्तुत है:-
- बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006
- दंड का प्रावधान
- सुप्रीम कोर्ट का दिशा-निर्देश
- बालिका वधु का संरक्षण और विवाह की शून्यता
- पीड़िता के अधिकारों की रक्षा
- बाल यौन शोषण कानून का पालन
- शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम
- किशोर न्याय अधिनियम का पालन
सुप्रीम कोर्ट में कई महत्वपूर्ण मुद्दे :-
- घोस्ट गन्स पर नियंत्रण
- कर्मचारी भेदभाव में महत्वपूर्ण बदलाव
- नाबालिगों के गोपनीयता अधिकार
- धर्म-आधारित कार्यस्थल आवास
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