
AMR 2.0 National Action Plan : केंद्र सरकार ने देश में तेजी से बढ़ रही रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance – AMR) की समस्या को रोकने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना AMR 2.0 की शुरुआत कर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य एंटीबायोटिक और अन्य रोगाणुरोधी दवाओं के अनियंत्रित उपयोग को सीमित करना, संक्रमण-नियंत्रण को मजबूत बनाना, स्वास्थ्य प्रणालियों को उन्नत करना और पूरे देश में निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।
‘वन-हेल्थ अप्रोच’ के तहत यह योजना मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण—चारों क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर काम करेगी। सरकार का मानना है कि यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में एंटीबायोटिक का असर कम होने से सामान्य संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकते हैं। AMR 2.0 का लक्ष्य उसी संभावित खतरे को रोकते हुए भारत को एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाना है।
एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस क्यों महत्वपूर्ण है?
- दवाओं का असर खत्म हो जाता है।
- जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी दवाओं के प्रति प्रतिरोधक बन जाते हैं, तो सामान्य एंटीबायोटिक भी उन पर प्रभाव नहीं डाल पाती।
- इससे मामूली संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है।
- सामान्य बीमारियों का इलाज मुश्किल हो जाता है।
- जो बीमारियाँ पहले आसानी से ठीक हो जाती थीं—जैसे निमोनिया, टीबी, टाइफाइड—वे अब अधिक जटिल और लंबे समय तक चलने वाली हो सकती हैं।
- उपचार महंगा और लंबा हो जाता है।
- दवाओं के काम न करने पर मरीज को महंगी और कई बार ज्यादा दुष्प्रभाव वाली दवाओं का सहारा लेना पड़ता है, जिससे इलाज की लागत बढ़ जाती है।
- सर्जरी और बड़े उपचार जोखिम में आ जाते हैं।
- ऑपरेशन, कैंसर उपचार, अंग प्रत्यारोपण जैसी प्रक्रियाएँ एंटीबायोटिक पर निर्भर होती हैं।
- यदि दवाएँ काम न करें तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- तेजी से वैश्विक फैलाव।
- AMR सीमाओं से परे है — दुनिया के किसी भी हिस्से में उभरा नया प्रतिरोध वैश्विक खतरा बन सकता है, क्योंकि यात्रा और व्यापार से संक्रमण तेजी से फैलता है।
- कृषि और पशुपालन पर भी प्रभाव।
- जानवरों में दवाओं के अत्यधिक उपयोग से विकसित प्रतिरोध मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे पूरा खाद्य चक्र जोखिम में आ जाता है।
- भविष्य में ‘पोस्ट-एंटीबायोटिक युग’ का खतरा।
- यदि समय पर रोक न लगाई गई तो एक ऐसा समय आ सकता है जब साधारण संक्रमण का भी कोई प्रभावी इलाज न बचे।
AMR 2.0 (2025–29) में नया क्या है?
- मजबूत वन-हेल्थ अप्रोच :–
- मानव, पशु, कृषि, पर्यावरण और फूड सिस्टम को एकीकृत फ्रेमवर्क में शामिल किया गया।
- डिजिटल AMR निगरानी प्रणाली :–
- देशभर में रियल-टाइम डेटा प्लेटफॉर्म और उन्नत AMR Surveillance Network 2.0 का निर्माण।
- अस्पतालों में अनिवार्य Antibiotic Stewardship Programs (ASP) :–
- एंटीबायोटिक उपयोग की नियमित समीक्षा और औषधि-नीति का मजबूत पालन।
- नई दवाओं, वैक्सीन और डायग्नॉस्टिक्स पर फोकस :–
- नए एंटीबायोटिक व तेज जांच तकनीक (रैपिड डायग्नॉस्टिक्स) के लिए रिसर्च और उद्योग साझेदारी को बढ़ावा।
- पर्यावरणीय निगरानी का विस्तार :–
- अस्पताल अपशिष्ट, फार्मा उद्योग, सीवेज और पानी में एंटीमाइक्रोबियल अवशेषों की नियमित और वैज्ञानिक निगरानी।
- पशुपालन व कृषि क्षेत्र में सख्त नियम :–
- बिना प्रिस्क्रिप्शन एंटीबायोटिक उपयोग पर रोक और फीड में AMR उपयोग की मजबूत निगरानी।
- Behaviour Change Framework :–
- जनजागरूकता के लिए नए डिजिटल कैंपेन, स्कूल/कॉलेज मॉड्यूल और प्रोफेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम।
- State Action Plan 2.0 अनिवार्य :–
- हर राज्य को अपनी AMR कार्य योजना बनाकर लागू करनी होगी; वार्षिक मूल्यांकन शामिल।
- AI/ML आधारित लैब अपग्रेडेशन :– आधुनिक तकनीक के साथ माइक्रोबायोलॉजी लैब नेटवर्क को सुदृढ़ करना।
- अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को और मजबूत किया गया :–
- WHO, FAO, UNEP और वैश्विक AMR रिसर्च नेटवर्क से और गहन सहयोग।
Important Points for Competitive Exams :-
- AMR का पूरा नाम: Antimicrobial Resistance
- योजना का नाम: National Action Plan on AMR 2.0 (2025–2029)
- उद्देश्य: एंटीबायोटिक दुरुपयोग रोकना, संक्रमण नियंत्रण मजबूत करना
- दृष्टिकोण: One-Health Approach वाला समन्वित मॉडल
- लागू मंत्रालय: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
- फ़ोकस क्षेत्र: मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, कृषि व पर्यावरण
- महत्त्व: एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस के बढ़ते खतरे को नियंत्रण करना
- मुख्य कार्य: निगरानी, अनुसंधान, सार्वजनिक जागरूकता, सुरक्षित दवा उपयोग
- अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य: WHO Global Action Plan on AMR के अनुरूप
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