
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में शामिल जस्टिस विक्रम नाथ को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) का नया एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति 24 नवंबर 2025 से प्रभावी हुई है और इसे राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से मंजूरी दी गई। परंपरा के अनुसार NALSA का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को सौंपा जाता है, जिसके तहत यह नियुक्ति की गई। जस्टिस नाथ पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट में न्यायाधीश एवं मुख्य न्यायाधीश के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा चुके हैं। उनकी पहचान एक प्रगतिशील न्यायाधीश के रूप में है, जिन्होंने पहली बार किसी हाई कोर्ट की कार्यवाही को यूट्यूब पर लाइव-स्ट्रीम करने की ऐतिहासिक पहल की थी।
NALSA देश के कमजोर तबकों को मुफ्त कानूनी सहायता, लोक अदालत, मध्यस्थता और पीड़ित-क्षतिपूर्ति जैसे सेवाएँ प्रदान करता है, और जस्टिस नाथ की नियुक्ति से इस संस्था में पारदर्शिता, पहुँच और न्याय वितरण की गति में और मजबूती आने की उम्मीद है। न्याय तक पहुंच को व्यापक रूप देने, कानूनी सहायता तंत्र को सक्षम बनाने और लोक अदालतों की प्रभावशीलता बढ़ाने में जस्टिस नाथ की भूमिका आने वाले समय में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
NALSA — क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है :-
- स्थापना (Establishment)
- NALSA की स्थापना Legal Services Authorities Act, 1987 के तहत की गई।
- यह 9 नवंबर 1995 से कार्यरत है।
- 9 नवंबर को ‘Legal Services Day’ भी मनाया जाता है।
- उद्देश्य (Objectives of NALSA)
- समाज के कमजोर, गरीब और वंचित वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराना।
- न्याय तक पहुंच (Access to Justice) को बढ़ाना।
- लोक अदालतों का आयोजन करना।
- ADR (Alternative Dispute Resolution) को बढ़ावा देना, जैसे:
- Mediation
- Conciliation
- Lok Adalat
- पीड़ित-क्षतिपूर्ति (Victim Compensation) स्कीम लागू करना।
मुख्यालय (Headquarters) NALSA का :- नई दिल्ली
- Composition (संरचना)
- Patron-in-Chief: भारत के Chief Justice of India (CJI)
- Executive Chairman: सुप्रीम कोर्ट का दूसरा वरिष्ठतम न्यायाधीश
- Present (2025): Justice Vikram Nath (Executive Chairman)
- प्रमुख योजनाएँ (Major Schemes of NALSA)
- Victim Compensation Scheme
- Free Legal Aid Scheme
- Legal Awareness Camps
- Child-Friendly Legal Services
- Women Legal Services
- Senior Citizen Legal Services
- Prison Legal Aid Clinics
- लोक अदालत (Lok Adalat)
- NALSA के तहत आयोजित की जाती हैं।
- इनका निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है।
- इसमें कोई अपील नहीं की जा सकती (सिवाय writ के)।
- Court Fee वापस मिल जाती है।
- विवाद आपसी सहमति से निपटाए जाते हैं।
- Free Legal Aid कौन ले सकता है? (Eligibility)
- Legal Services Authorities Act, 1987 की धारा 12 के अनुसार—
- महिलाएँ
- बच्चे
- एससी/एसटी वर्ग
- पीड़ित महिलाएँ/अपराध के शिकार
- Trafficking victims
- Disabled persons
- Industrial workers
- Custody में व्यक्ति (जेल / रिमांड)
- ऐसी व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से कम हो।
- Nyaya Deep (Newsletter)
- NALSA की आधिकारिक पत्रिका।
- इसमें कानूनी सहायता गतिविधियों की रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है।
- State और District Legal Services Authorities
- हर राज्य में SLSA (State Legal Services Authority)
- हर जिले में DLSA (District Legal Services Authority)
- DLSA के चेयरमैन: संबंधित जिले का District Judge
- महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)
- NALSA को एक Statutory Body माना जाता है।
- Supreme Court Legal Services Committee (SCLSC) NALSA का हिस्सा है।
- 2018 से लोक अदालतें E-Lok Adalat के रूप में भी चल रही हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ — पृष्ठभूमि
- जन्म और प्रारंभिक जीवन
- जस्टिस विक्रम नाथ का जन्म 24 सितंबर 1962 को हुआ।
- उन्होंने कानून की शिक्षा प्राप्त कर वकालत के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य किया।
- न्यायिक सेवा की शुरुआत
- उन्होंने अपना करियर इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकील के रूप में शुरू किया।
- वे सिविल, सर्विस, रेवेन्यू और कंस्टीट्यूशनल मामलों में विशेषज्ञ माने जाते हैं।
- इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायाधीश
- जस्टिस विक्रम नाथ को 24 मार्च 2004 को इलाहाबाद हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।
- यहाँ उन्होंने लंबे समय तक न्यायिक सेवा दी और कई महत्वपूर्ण फैसलों में योगदान दिया।
- गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
- बाद में उन्हें गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्त किया गया।
- वे देश के पहले ऐसे हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश बने जिन्होंने कोर्ट की कार्यवाही को YouTube पर लाइव-स्ट्रीम कराने की पहल की — यह न्यायपालिका की पारदर्शिता के लिए बड़ा कदम था।
- सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति
- 31 अगस्त 2021 को वे भारत के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनाए गए।
- सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने संविधान, प्रशासनिक कानून, आपराधिक न्याय और मानवाधिकार मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय दिए।
- वरिष्ठता और वर्तमान भूमिका
- वे 2025 में सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं।
- इसी वरिष्ठता के आधार पर उन्हें NALSA (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया गया।
महत्वपूर्ण विशेषताएँ :-
- न्यायपालिका में पारदर्शिता और तकनीक के उपयोग के समर्थक।
- कानूनी सहायता, मानवाधिकार और न्याय तक पहुंच (Access to Justice) पर जोर।
- लोगों की न्याय तक आसान पहुँच के लिए कई पहल में सक्रिय भूमिका।
- लोक अदालत और मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के प्रोत्साहक।
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